अनेक प्राचीन युग-बिन्दुओं तथा लगभग ५०० ई. के आसपास मकरसंक्रान्ति और शीतकालीन अयनांत लगभग एक ही समय पर आते दिखाई देते हैं। सम्भवतः इसी प्रकार के खगोलीय संयोग ने मकरसंक्रान्ति और उत्तरायण के एकत्व की परम्परा को जन्म और स्थायित्व दिया हो।
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